शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

अगर तुम कहो...

लोट कर के तो आओ ओ महजबीन, अपनी यादें मैं भेजु अगर तुम कहो
फुल खिलने को है शहर भी सज रहे, मैं दिवाली मना लू अगर तुम कहो
उन वादों का क्या वो कसक कहा गई, तुमको मिलने तक की तो फुरसत नहीं
मैं खाली हूं हर पल तुम्हारे लिए, मैं ही मिलने आ जाऊ अगर तुम कहो
तुमने अपना दिवाना बनाया मुझे, रातों में कितना तड़पाया मुझे
अब तो महफिल में आओ, रास्ते में दिल बिछा दू अगर तुम कहो
जिंदगी की इस दौड़ में तुम्हारा साथ चाहिए, हाथों में तुम्हारा हाथ चाहिए
अपने हाथों से छू लू, तुम्हारी ये नाजुक हथेली अगर तुम कहो
तुम मेरी ना थी..ना हो..ना होगी, हर कोई ये मुखालफत करता है
मैं इनको तुम्हारे दिल का हाल सुना दू, अगर तुम कहो
तुम मेरी चाहत हो, तुम दिल की धड़कन हो, नगमें तराना हो दिल का
इन सबको मिलाकर एक ग़ज़ल सुना दूं अगर तुम कहो
तुम मेरे पास होकर भी मुझसे दूर, मैं दूर होकर भी तुम्हारे इतना पास
ये बात सब दोस्त जानते है, तुम्हें भी समझा दू अगर तुम कहो
तुम मेरी हाथों की लकीरों में नहीं, पर जिंदगी का अनमोल पहलू हो तुम
मुझ पर किसका हक़, मै तो सिर्फ तुम्हारा हूं अगर तुम कहो
लोट कर के तो आओ ओ महजबीन, अपनी यादें मैं भेजु अगर तुम कहो

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